जंतर मंतर – छिपा हुआ सच

₹299.00

+ Free Shipping

एक शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन।
दो रहस्यमय मौतें।
एक सुपरस्टार, जो इस सबके बीच फँस जाता है।
और एक ऐसा सच, जिसे कोई दफन करना चाहता है।

अठारह दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर हजारों छात्र बदलाव की मांग को लेकर जुटे हुए हैं। उनके आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, फिल्मी सितारे और ताकतवर समर्थक इस आंदोलन से जुड़ने लगे हैं।

फिर एक रात सब कुछ बदल जाता है।

आंदोलन के दो प्रमुख सदस्य—प्रभात मिश्रा और कामिनी सहाय—एक लग्जरी वैनिटी वैन के अंदर मृत पाए जाते हैं। आंदोलन के एक और नेता, तेनज़िन आंगचुक, को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया जाता है।

शुरुआती सबूत कई दिशाओं की ओर इशारा करते हैं—लेकिन उनमें से कोई भी पूरी सच्चाई सामने नहीं लाता।

ACP अदिति राव जांच की जिम्मेदारी संभालती हैं। वह जानती हैं कि राजनीति, सेलिब्रिटी प्रभाव और लगातार चल रही मीडिया अटकलों से घिरे मामले में सबसे आसान रास्ता होता है—पहली भरोसेमंद लगने वाली थ्योरी को सच मान लेना।

लेकिन अदिति ऐसा नहीं करतीं।

वह सबूतों का पीछा करती हैं।

एक साधारण-सा दिखने वाला वित्तीय लेन-देन।

प्रोटेस्ट साइट पर पहुंचाया गया एक रहस्यमय सामान।

एक ऐसी वैनिटी वैन, जिसमें कोर टीम के कई लोगों की पहुंच थी।

अंदर की हर गतिविधि पर नजर रखने वाला एक छिपा हुआ कैमरा।

कुछ ऐसे फोन कॉल, जो लोगों के बताए हुए किस्सों से मेल नहीं खाते।

कुछ ऐसे रिश्ते, जिन्हें जानबूझकर छिपाकर रखा गया है।

और एक ऐसा आंदोलन, जिसकी विशाल व्यवस्था को देखकर लगता है कि उसे चलाने वाला कोई एक व्यक्ति है ही नहीं।

फिर जांच का रुख होता है आर्यन खन्ना की ओर—भारत के सबसे बड़े फिल्म सितारे और आंदोलन के सबसे प्रभावशाली समर्थकों में से एक।

मीडिया ने पहले ही तय कर लिया है कि कहानी क्या है।

लेकिन अदिति ने नहीं।

जैसे-जैसे अलग-अलग जांच टीमें पैसे के लेन-देन, फोन कॉल्स, रिश्तों और आंदोलन के पीछे काम कर रही विशाल व्यवस्था की तह तक पहुंचती हैं, एक-दूसरे से असंबंधित दिखाई देने वाले सुराग धीरे-धीरे एक-दूसरे से जुड़ने लगते हैं।

कोई नजर रख रहा था।

कोई पैसे दे रहा था।

कोई पर्दे के पीछे से घटनाओं को अपने हिसाब से मोड़ रहा था।

और कोई ऐसा भी है, जिसे पता है कि अगर सच सामने आया, तो कई ताकतवर लोग गिर जाएंगे।

जंतर मंतर सत्ता, महत्वाकांक्षा, वफादारी और धोखे की कहानी है—एक ऐसी सिनेमैटिक राजनीतिक थ्रिलर, जिसमें एक जांच अधिकारी जानती है कि सच्चाई अक्सर उस कहानी में नहीं मिलती, जिसे सबसे ज्यादा जोर से सुनाया जा रहा हो।

क्योंकि जब हर किसी के पास अपनी एक थ्योरी हो…

तो सबूत ही एक ऐसी चीज है, जो झूठ नहीं बोल सकती।

 

Category:
Guaranteed Safe Checkout

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “जंतर मंतर – छिपा हुआ सच”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जंतरजंतर मंतर – छिपा हुआ सच
₹299.00